Tuesday, 3 September 2019

एक भारत-विजयी भारत



विवेकानन्द शिला स्मारक की स्थापना को 50वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य में विवेकानन्द केन्द्र ‘‘एक भारत-विजयी भारत’’ का सन्देश जन-जन तक पहुंचा रहा है। विवेकानन्द केन्द्र की हिन्दी मासिक पत्रिका होने के नाते इसी विषय को केन्द्र में रखकर इस अंक की रचना की गई है।
जब भी भारत एक ध्येय को लेकर जीता है तब उस ध्येय को निश्चित रूप से वह प्राप्त करता है। अर्थात् जब भी भारत एक होता है, वह विजयी होता है। इसलिए भारतीय इतिहास की वह गौरवगाथा जिसे पढ़कर हममें प्रेरणा जगे, हमारा आत्मविश्वास बढ़े, का अध्ययन हमें करना होगा। इतिहास को स्मरण करके वर्तमान का नियोजन करना चाहिए ताकि भविष्य उज्जवल हो। यह सोचकर हमने इतिहास के तथ्यों को अपने पाठकों तक पहुँचाने का निश्चय किया है। भारत में मुग़ल शासन के दौरान भारत के संतों ने अध्यात्म और भक्ति की धारा देशभर में प्रवाहित की जिससे सारा समाज संगठित हुआ। समाज का संतों ने प्रबोधन किया। इसलिए इस अंक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल जी की पुस्तक ‘‘भारत में संत परम्परा और सामाजिक समरसता’’ से विचारों को उन्हीं के शब्धों में संकलित किया है, जो कि बेहद प्रासंगिक, तथ्यपरक तथा अनुकरणीय है।
साथ ही इस अंक में भगवान श्रीराम, सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, आदि शंकराचार्य, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविन्द सिंह, स्वामी विवेकानन्द, सरदार पटेल आदि पर विशेष लेख समाहित हैं। इन महापुरुषों ने भारत को विजयी बनाने के लिए किस तरह प्रयत्न किए इसका विशद वर्णन किया गया है। अंक में ‘‘दिशाबोध’’ नामक स्तम्भ विशेष उल्लेखनीय है। आगामी एक वर्ष स्थायी स्तम्भ के रूप में ‘‘एक भारत-विजयी भारत’’ पर लेखमाला प्रकाशित की जाएगी जिसमें भारत को एकसूत्र में जोड़नेवाले, भारत को विजयी बनाने वाले महानायकों के जीवन-कार्यों का वर्णन होगा।
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